Tuesday, May 30, 2006

अभियान ट्यूरिंग

पहले पहेली बाज भाई साहब की पहेली ने घर मे कम्पन दिये फिर सुनील भाई साहब ने जो अपने चिठ्ठे पर 'बचपन के सपने' नाम की चिठ्ठी पोस्ट कर दी कि पूछिये नहीं कि घर मे क्या हो गया| अरे यह पूछिये कि क्या, क्या नहीं हुआ| बस समझिये भूचाल ही नहीं आया और सब कुछ| सुनील भाई साहब काहे को आपने दुखती नब्ज़ पकड़ ली|

पहले तो साल मे एक, दो बार था, आजकल तो जब देखो तब पुरानी बातो के बारे मे बात करने लगते हैं| अब क्या फायदा उन सब के बारे मे बात करने का| जहां हो उसी मे आनन्द ढूढना चाहिये - वही सत्य है; वही जीवन है| फिर भी यह जो बोलते हैं, सुनती हूं| शायद मुझसे ही बात करने से इनकी भड़ास निकल जाये|

आजकल जुट गयें है उन लोगों के बारे मे लिखने के लिये जिनसे इन्हे प्रेणना मिली है| अभी तो अधूरे सपने नाम की चिठ्ठी पोस्ट की है| उसके बाद रिचर्ड फिलिप्स फाइनमेन पर पहली चिठ्ठी पोस्ट की है, यह ४ या ५ कड़ियों तक जायगि| उसके बाद ये कर्ट गोडेल पर लिखने को कह रहे हैं, फिर रामानुजन पर, फिर आईसेक एसीमोव पर, फिर रौबर्ट ओपेनहाईमर पर, फिर ... पर, मालुम नहीं कब तक कितने लोगों तक यह जायगी|

इनसे पता लगा है कि एक नया चिठ्ठा शुरू हुआ है 'टोने-टुटके'| यह काफी समय, लोगों को टोने-टुटके जैसी चीजो की कमियों तथा गलतियां बताने मे लगाते हैं| मैने 'टोने-टुटके' की किसी चिठ्ठी को नहीं पढ़ा है पर इन्होने इसकी हर चिठ्ठी को बहुत ध्यान से पढ़ा है| लगता है कि कुछ लिखेंगे| इधर नितिन भईया ने भी 'क्या हम सुधरेंगे' नाम की पोस्ट निकाल दी है| तब से कह रहें हैं कि ज्योतिष एवं हस्त रेखा भी एक तरह का टोना-टुटका है| एक सिरीस निकालने 'ज्योतिष और टोने-टुटके' टाईटल से निकालने की बात कर रहे हैं जिसमे बतायेंगे कि ज्योतिष एवं हस्त रेखांये ढकोसला हैं|

मानो तो पत्थर भी भगवान है, न मानो तो पत्थर ही है| यह सब तो विशवास की बातें हैं कईयों को जब कोई सहारा नहीं मिलता है तब लोग इनके पास जाते हैं| पंडित जी ने सुना, सांत्वना दी, कुछ उपचार बताया| इससे उस व्यक्ति को कुछ हिम्मत आयी कुछ इच्छा शक्ति जाग्रत हुई, उसने अपने आप से मुशकिल पार कर ली| मुशकिल हल हो गयी तो बहुत अच्छी बात है, नहीं तो भाग्य के खाते मे डाल दिया| पंडित जी से मिल कर मुशकिल मे कुछ हौसला तो देने वाला कोई मिला| आजकल तो मुशकिल के समय सब साथ छोड़ देते हैं| यह सब तो आस्था की बात है इसमे तर्क तो नहीं लगाना चाहिये|

नितिन भईया ने केवल 'क्या हम सुधरेंगे' नाम की पोस्ट ही नहीं कि पर एक ४=५ सिद्ध करते हुये एक ईमेल भेज दी| उस दिन से कई बार अपने से कहने लगते हैं कि लिखूं कि न लिखूं| मुझे तो कुछ भी नहीं बता रहे हैं पर जरूर कोई विवादस्पद बात लिखने की सोच रहें हैं| हिम्मत होगी तो ...| हिम्मत तो होगी ही,
  • एक बार, मन्दिर-मस्जिद मसले मे हो रही सभा मे बोलने लगे| मन्दिर वाले इतना गुस्सा हो गये कि वहीं मारने पर उतारू हो गये| खैर मनाईये कि पिताजी के मित्रगण भी वहां थे उन्होने बचाया;
  • चुनाव मे हो रही धांधली के खिलाफ बोलना जरूर है| एक बार ऐसे ही चुनाव मे गये, उस क्षेत्र का मतदान चुनाव कमीशन ने इनकी रिपोर्ट पर फिर से करवाया| पर वह उस रात १ बजे लौटे तो सर फटा था, ५ टांके लगे थे - भगवान ने ही रक्षा की| मेरी कसम दिलवाने के बाद ही जाना छोड़ा|
लगता है कि कुछ और ही बात है| क्या ... जरूरत है विवादस्पद मुद्दों पर बोलने की, चुप रहो, कई बार मेरी इनसे बहस हो चुकी है पर मानते ही नहीं|

आजकल तो अपनी प्रिय जगह भी नहीं बैठ रहें हैं| हर समय कम्प्यूटर पर बैठे रहते हैं| टौमी भी हमेशा इन्ही को देखता रहता है| अपनी पदवी के बारे मे तो यह 'शान्ति रहे हमेशा, उससे चिपकी' वाली पोस्ट पर बता चुके हैं| यदि यही ढर्रा रहा तो उसमे 'महा' जुड़ने अब कोई देर नहीं है|

लगता है कि मुझे ही कुछ करना होगा|

क्या आप लोगों को कोई ऐसा प्रोग्राम मालुम है कि इन्टरनेट कट जाये पर फोन न कटे| मालुम हो तो बताइयेगा| मुझे तो इनको ब्लौगिंग से रोकने का यही हल लगता है| मै और लोगों से भी पूंछती हूं| चलू देखूं कि श्रीमान ट्यूरिंग जी का क्या फोन नम्बर है| बात करके देखती हूं उन्हे जरूर मालुम होगा| नहीं तो टेलीफोन ओपरेटर भाईसाहब तो हैं ही| जरूर कोई सटीक तरीका निकालेंगे| इस अभियान का गुप्त नाम मैने 'अभियान ट्यूरिंग' रखा है| इस अभियान मे जैसे ही कुछ प्रगति होती है मै आपको बताती हूं| पर प्रगति हुई तो आपको खुद ही मालुम चल जायगा - यह आपको अपनी चिठ्ठियों से बोर नहीं कर पायेंगे|

Wednesday, May 17, 2006

ऐवें वाली बात, ब्लू-टूथ और झींगा मछली

किसी भी चिठ्ठि पर टिप्पणी मिलती है तो अच्छा लगता है| मेरा भी मन करता है कि टिप्पणी करूं पर समय नहीं मिलता इसलिये यह जिम्मा मुन्ने के बापू का|

मेरी पिछली मोबाईल फोन की चिठ्ठी पर, नरुला भइया ने टिप्पणी करते हुऐ, एक राज की बात पूछी थी,
'यह हिन्दूस्तानी पत्नियाँ अपने इन को ऐवें ही क्यों समझती हैं। हालाकिं पति के लिए जो भाव वे हार्टस ऑफ हार्टस में रखती है वैसा यहाँ की (अमरीका खासकर) पश्चिमी औरते भी रखती तो यहाँ के वकीलों की छुट्टी हो गई होती। पर फिर बाहरी तौर ऐवें वाली बात के पीछे की मनोस्थिति के बारे में प्रकाश डालिए| अब यह मत कहिएगा कि बिजली नहीँ है तो प्रकाश क्या खाक डालूँ।'

सच मे, मेरे कसबे मे १० घंटे से ज्यादा बिजली नहीं आती है, प्रकाश कैसे डालूं| मै अपनी कई बहनो के चिठ्ठे नारद पर पढ़ती हूं शायद वे इस विषय पर अच्छा प्रकाश डालें|

नरुला भइया आपने अपनी टिप्पणी मे इनसे ब्लू-टूथ के इतिहास और उस राजा कि कहानी पूछ कर बताने को कहा है| इसमे कुछ तकनीक की भी बात है यही आप सब को ज्यादा अच्छी तरह से बतायेंगे| मैने इनसे कह दिया है पर यह अभी अपनी धुन मे हैं| इन्होने ओपेन सोर्स सौफ्टवेयर की चर्चा १ली कड़ी ओपेन सोर्स सौफ्टवेर से शुरू कर १५वीं कड़ी लिनूस टोरवाल्डस एवं बिल गेट्स के विचार पर समाप्त की है| लिनेक्स पर एक नयी सिरीस शुरू की है| जिसकी दो कड़ियां लिनेक्स: शुरुवात - यूनिक्स से और लिनेक्स: करनल, डिस्ट्रीब्यूशन, डेस्कटौप पोस्ट कर दी हैं| इसी बीच पहेली-बाज भाई साहब ने मालुम नहीं क्यों और किस लिये पहेली चिठ्ठा शुरू कर दिया| मिलूंगी तो तुरन्त पहेली चिठ्ठे को बन्द करने को कहूंगी| जब से शुरू हुआ है इसके अलावा कोई बात नहीं करते| सारी पुरानी किताबों को निकलवाया, मुझसे धूल झड़वायी| बस उसी से सम्बन्धित चिठ्ठी पर चिठ्ठी पोस्ट किये जा रहे हैं तीन चिठ्ठियां (१) मार्टिन गार्डनर, (२) मार्टिन गार्डनर की पुस्तकें, और (३) पहेली बाज ज़ज पर कर चुकें हैं| जब से नारद जी की छड़ी वाली पहेली आयी है तब से जीना और दूभर होगया है| कह रहे हैं यह पहेली बहुत महत्वपूण है इसका सम्बन्ध कई जगह से है| दो नयी सिरीस नारद जी की छड़ी और शतरंज का जादू एवं गणित, चिप, एवं कमप्यूटर विज्ञान शुरु करने की बात कर रहे हैं नारद जी की छड़ी और शतरंज का जादू की पहली कड़ी तो पोस्ट भी कर दी है| जाहिर है यह पहेलियों के दीवाने हैं और मैं, क्या कहूं अपने बारे मे, जिसकी शादी ऐसे व्यक्ति से हुई हो जो खुद अपने मे एक पहेली हो|

पंकज भइया मेरे यहां झींगा मछली २०० से ४०० रुपये प्रति किलो मिलती है| भाव उसके आकार पर निर्भर है जितनी बड़ी उतना ज्यादा| मैं ब्लू-टुथ व राजा की कहानी सुनाने मे सक्षम नहीं हूं पर मै यह अवश्य बता सकती हूं कि झींगा मछली कैसे बनायी जाय| उसके बनाने कि विधि इस प्रकार है| मुझे यह मेरी एक बंगाली सखी ने सिखाया है|

झींगा मछली बनाने की विधि: तीन से चार लोगों के लिये
  1. आधा किलो झींगा मछली को साफ कर लें: पहले सिर काट कर मल थैला निकाल कर फेंक दें, फिर पूंछ काटें और फिर काली नस खींच कर निकाल दें (deveining)| यह काम सावधानी से करें क्योंकि झींगा मछली की सफाई और मछलियों की सफाई करने से ज्यादा महत्वपूण है|
  2. एक कच्चा नारियल मिक्सी में पीसें और गरम पानी में भिगों दें| थोडी देर पश्‍चात उसका दूध छान कर निकालें|
  3. झींगा मछली को तेल में तल कर अलग रख लें|
  4. बचे हुये तेल में प्याज, लहसुन, अदरक को पीस कर तेल में भूनें। लौंग, दालचीनी, छोटी इलायची को पानी के साथ बारीक पीस कर इसमें मिलायें और भूनें। हल्दी, नमक और चीनी मिला दें| यह सब स्वाद के अनुसार|
  5. अब नारियल वाला दूध इसमें मिलायें और खूब उबालें|
  6. अलग रखी हुई झींगा मछली को डाल दें और ५ मिनट ढंक कर पकायें|
मैं जानती हूं कि यह इन पंकज भइया को पसन्द आयेगा पर इन वाले पंकज भइया को नहीं| क्योंकि इन्होने कुछ दिन पहले यह चित्र प्रकाशित किया था तब से मेरा मन नौन-वेज बनाने का या खाने का नहीं करता, पर,

जो हो इनको पसन्द,
केवल, वह ही नहीं पसन्द मेरी|
कुछ और भी है, पसन्द मुझको,
पर बेशक, वह भी है पसन्द मेरी|

आपस मे थोड़ी चुहुल बाजी,
कुछ हंसी-मजाक|
है जीवन मे जरूरी,
न केवल लाता यह, जीवन मे रंग,
पर रखता हम दोनो को संग|

यह हैं भाव, हम दोनो के,
पर छन्द केवल इनके|

यह चिठ्ठी मैने नरुला भइया की राज की बात बताने से शुरू की थी| वहीं पर समाप्त करना चाहूंगी - मालुम नहीं इस चिठ्ठी के अन्त होते होते तक उस राज का खुलासा हुआ कि नहीं|

Sunday, May 14, 2006

मोबाईल फोन

      छुट्टियों मे सुबह समय मिल जाता है, बगल के सरकारी बाग मे पैदल घूमने की सुविधा है: बाग का चक्कर लगाइये और स्वस्थ रहिये| आज सुबह अकेले ही जाना पड़ा| यह तो खुर्राटें मार कर सो रहे थे| रात भर कमप्यूटर मे बैठे थे: टिप्पणी तो कोई आती नहीं पर चिठ्ठी पर चिठ्ठी पोस्ट किये जा रहे हैं| कई बार कहा कि कोई काम कि बात कहोगे तब ही तो कोई टिप्पणी आयेगी, पर सुनते ही नहीं|

      पैदल चलते हुऐ, देखा कि सामने से एक महाशय दोनो हांथों को तेजी से आगे पीछे करते चले आ रहे थे, लगता है कि हांथों की कसरत कर रहे थे| साथ मे तेजी से बड़बड़ा रहे थे| कुछ डर लगा, फिर लगा कि कहीं इसका दिमाग तो ...| थोड़ा और पास पहुंची तो देखा कि महाशय कान मे छोटा सा ear phone लगाये थे और फोन पर बात कर रहे थे| बाल कुछ लम्बे थे| इसलिये ear phone ठीक से दिखायी नहीं पड़ रहा था| फोन का instrument भी दिखायी नहीं पड़ रहा था लगता था कि वह उनके जेब मे था| यह कुछ नयी तरह का फोन था| शायद वायर-लेस पर हो या जैसा कि यह एक दिन बता रहे थे - ब्लू-टूथ पर हो| ब्लू-टूथ - अजीब सा नाम नहीं है| एक दिन मैने इनसे यही कहा तो इन्होने उस राजा की कहानी बतायी थी जिसके कारण यह नाम पड़ा और क्यों उसी राजा को लिया गया| भूल गयी, नहीं तो आपको भी बताती| अपने पर हंसी भी आयी और कुछ शर्म भी| इतना भी नहीं समझ पायी और मालुम नहीं सज्जन के बारे मे क्या क्या सोच लिया|

      इस तरह के फोन और लोग क्यों नहीं रखते| सड़कों पर देखिये: स्कूटर, मोटर-साईकल, कार पर लोग चले जा रहे हैं - बांये हाथ से हैंडल पकड़ा हुआ है, दहिने हांथ मे मोबाईल फोन है जो कि कान पर लगा है| कितनी बात करनी होती है लोगों को| सारा ध्यान बात मे| न सड़क पर चलने वालों कि चिन्ता, न अपनी चिन्ता, न ही अपने घर वालों कि चिन्ता| यदि कुछ हो गया तो घर मे बीबी, बच्चों का क्या होगा| भगवान न करे किसी को हो कुछ हो जाये| सोनिया जी से फ़रियाद करती हूं कि शायद कोई कानून पास हो जाये|

      मैने तो मुन्ने के बापू को न ही केवल अपनी, पर मुन्ने एवं मुन्नी की भी कसम दिलवा रखी है स्कूटर चलाते समय फोन आये, तो उठाओ नहीं पहुंच कर वापस फोन कर लो या जरूरी फोन का इन्तज़ार हो तो बगल मे स्कूटर खड़ी करो और जी चाहे बात करो (ऐसे इनके पास कोई जरूरी फोन आता नहीं)|

      चलूं सुना है बाज़ार मे आज जम्बो झींगा मछली आयीं हैं| बना देती हूं इन्हे पसन्द हैं| टिप्पणी न आने का दुख - कुछ तो कम होगा|

Sunday, May 07, 2006

बैठने की प्रिय जगह

मुन्ने के बापू यदि कमप्यूटर के सामने न बैठें हों तो उनका प्रिय जगह है: टीवी के सामने, सोफे पर, और पैर टीवी तथा सोफे के बीच मे रखी मेज के उपर| वह वहां पर क्या कर रहे होते हैं यह इस पर निर्भर करता है कि टीवी में क्या आ रहा है|

यदि हौकी या क्रिकेट का मैच है और हिन्दुस्तान खेल रही है तो उनकी गोद में टौमी, वही अपना कुत्ता, होगा| जिसे वे प्यार से दहिने हांथ से सहला रहे होंगे और वह अपनी लम्बी जीभ निकाल कर उनके मुंह को बड़े प्रेम से चाट रहा होगा उंह....हूं ... | कभी कभी उनका और टौमी का बैलेन्स गड़बड़ा जाता है क्योंकि वे हिन्दुस्तान की टीम को बक-अप करने लगते हैं जैसे हिन्दुस्तान की टीम के पास टेलीपैथी हो और केवल उनकी बात ही सुन रही हो| अरे चुपचाप मैच देखो|

यदि हौकी या क्रिकेट का मैच नहीं आ रहा है तो और मुशकिल| टौमी बांयी तरफ बगल मे नीचे, जिसे वे बांये हाथ से सहला रहे होते हैं तथा दांये हांथ मे रिमोट रहता है जिस पर उनकी उंगलियां ऐसे थिरक रही होती हैं जैसे कोई नृत्यांगना भारत-नाटय्म कर रही हो| क्या मजाल है कि कोई चैनल पर २ या ३ सेकंड से ज्यादा रुकती हों| कहो कि २-३ मिनट तो देखो, प्रोग्राम तो समझने दो, फिर चैनल बदलो| कहेंगे,
'क्या देखना सब में एक ही बात रहती है, सब मालुम है|'
कभी खबरें आ रहीं हों, सुनने का मन करे: तो उनका सधा सधाया जवाब है
'क्या करना है कहीं चोरी कहीं डकैती तो कहीं खून| क्या इसके अलावा कोई और खबर रहती है क्या?'

क्या आपको ऐसे रिमोट के बारे मे मालुम है जिसमे कम से कम ३ से लेकर ५ मिनट तक चैनल नहीं बदले जा सकते हों: बस वही लगा देना है|