ऐवें वाली बात, ब्लू-टूथ और झींगा मछली

किसी भी चिठ्ठि पर टिप्पणी मिलती है तो अच्छा लगता है| मेरा भी मन करता है कि टिप्पणी करूं पर समय नहीं मिलता इसलिये यह जिम्मा मुन्ने के बापू का|

मेरी पिछली मोबाईल फोन की चिठ्ठी पर, नरुला भइया ने टिप्पणी करते हुऐ, एक राज की बात पूछी थी,
'यह हिन्दूस्तानी पत्नियाँ अपने इन को ऐवें ही क्यों समझती हैं। हालाकिं पति के लिए जो भाव वे हार्टस ऑफ हार्टस में रखती है वैसा यहाँ की (अमरीका खासकर) पश्चिमी औरते भी रखती तो यहाँ के वकीलों की छुट्टी हो गई होती। पर फिर बाहरी तौर ऐवें वाली बात के पीछे की मनोस्थिति के बारे में प्रकाश डालिए| अब यह मत कहिएगा कि बिजली नहीँ है तो प्रकाश क्या खाक डालूँ।'

सच मे, मेरे कसबे मे १० घंटे से ज्यादा बिजली नहीं आती है, प्रकाश कैसे डालूं| मै अपनी कई बहनो के चिठ्ठे नारद पर पढ़ती हूं शायद वे इस विषय पर अच्छा प्रकाश डालें|

नरुला भइया आपने अपनी टिप्पणी मे इनसे ब्लू-टूथ के इतिहास और उस राजा कि कहानी पूछ कर बताने को कहा है| इसमे कुछ तकनीक की भी बात है यही आप सब को ज्यादा अच्छी तरह से बतायेंगे| मैने इनसे कह दिया है पर यह अभी अपनी धुन मे हैं| इन्होने ओपेन सोर्स सौफ्टवेयर की चर्चा १ली कड़ी ओपेन सोर्स सौफ्टवेर से शुरू कर १५वीं कड़ी लिनूस टोरवाल्डस एवं बिल गेट्स के विचार पर समाप्त की है| लिनेक्स पर एक नयी सिरीस शुरू की है| जिसकी दो कड़ियां लिनेक्स: शुरुवात - यूनिक्स से और लिनेक्स: करनल, डिस्ट्रीब्यूशन, डेस्कटौप पोस्ट कर दी हैं| इसी बीच पहेली-बाज भाई साहब ने मालुम नहीं क्यों और किस लिये पहेली चिठ्ठा शुरू कर दिया| मिलूंगी तो तुरन्त पहेली चिठ्ठे को बन्द करने को कहूंगी| जब से शुरू हुआ है इसके अलावा कोई बात नहीं करते| सारी पुरानी किताबों को निकलवाया, मुझसे धूल झड़वायी| बस उसी से सम्बन्धित चिठ्ठी पर चिठ्ठी पोस्ट किये जा रहे हैं तीन चिठ्ठियां (१) मार्टिन गार्डनर, (२) मार्टिन गार्डनर की पुस्तकें, और (३) पहेली बाज ज़ज पर कर चुकें हैं| जब से नारद जी की छड़ी वाली पहेली आयी है तब से जीना और दूभर होगया है| कह रहे हैं यह पहेली बहुत महत्वपूण है इसका सम्बन्ध कई जगह से है| दो नयी सिरीस नारद जी की छड़ी और शतरंज का जादू एवं गणित, चिप, एवं कमप्यूटर विज्ञान शुरु करने की बात कर रहे हैं नारद जी की छड़ी और शतरंज का जादू की पहली कड़ी तो पोस्ट भी कर दी है| जाहिर है यह पहेलियों के दीवाने हैं और मैं, क्या कहूं अपने बारे मे, जिसकी शादी ऐसे व्यक्ति से हुई हो जो खुद अपने मे एक पहेली हो|

पंकज भइया मेरे यहां झींगा मछली २०० से ४०० रुपये प्रति किलो मिलती है| भाव उसके आकार पर निर्भर है जितनी बड़ी उतना ज्यादा| मैं ब्लू-टुथ व राजा की कहानी सुनाने मे सक्षम नहीं हूं पर मै यह अवश्य बता सकती हूं कि झींगा मछली कैसे बनायी जाय| उसके बनाने कि विधि इस प्रकार है| मुझे यह मेरी एक बंगाली सखी ने सिखाया है|

झींगा मछली बनाने की विधि: तीन से चार लोगों के लिये
  1. आधा किलो झींगा मछली को साफ कर लें: पहले सिर काट कर मल थैला निकाल कर फेंक दें, फिर पूंछ काटें और फिर काली नस खींच कर निकाल दें (deveining)| यह काम सावधानी से करें क्योंकि झींगा मछली की सफाई और मछलियों की सफाई करने से ज्यादा महत्वपूण है|
  2. एक कच्चा नारियल मिक्सी में पीसें और गरम पानी में भिगों दें| थोडी देर पश्‍चात उसका दूध छान कर निकालें|
  3. झींगा मछली को तेल में तल कर अलग रख लें|
  4. बचे हुये तेल में प्याज, लहसुन, अदरक को पीस कर तेल में भूनें। लौंग, दालचीनी, छोटी इलायची को पानी के साथ बारीक पीस कर इसमें मिलायें और भूनें। हल्दी, नमक और चीनी मिला दें| यह सब स्वाद के अनुसार|
  5. अब नारियल वाला दूध इसमें मिलायें और खूब उबालें|
  6. अलग रखी हुई झींगा मछली को डाल दें और ५ मिनट ढंक कर पकायें|
मैं जानती हूं कि यह इन पंकज भइया को पसन्द आयेगा पर इन वाले पंकज भइया को नहीं| क्योंकि इन्होने कुछ दिन पहले यह चित्र प्रकाशित किया था तब से मेरा मन नौन-वेज बनाने का या खाने का नहीं करता, पर,

जो हो इनको पसन्द,
केवल, वह ही नहीं पसन्द मेरी|
कुछ और भी है, पसन्द मुझको,
पर बेशक, वह भी है पसन्द मेरी|

आपस मे थोड़ी चुहुल बाजी,
कुछ हंसी-मजाक|
है जीवन मे जरूरी,
न केवल लाता यह, जीवन मे रंग,
पर रखता हम दोनो को संग|

यह हैं भाव, हम दोनो के,
पर छन्द केवल इनके|

यह चिठ्ठी मैने नरुला भइया की राज की बात बताने से शुरू की थी| वहीं पर समाप्त करना चाहूंगी - मालुम नहीं इस चिठ्ठी के अन्त होते होते तक उस राज का खुलासा हुआ कि नहीं|

Comments

  1. भौजी, प्रणाम.

    आप कहें तो ई पहेली-सहेली सब बंद कर दे हम।

    पर का है की जैसे उन्मुक्त भैया एक पहेली हैं वैसे ही हम भी हैं।

    अब आप तो समझ ही सकती हैं कि इन सबके बिना हमारी हालत बिन मछली के पानी की तरह , अर्र, मेरा मतलब है बिन पानी के मछली की तरह हो जाएगी। वैसे आपका आदेश सर-आँखों पर होगा।

    पर उन्मुक्त, भौजी का जीना दुभर मत करें ।

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  2. ये सब क्या गोलमाल है?

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  3. कौन न मर जाए मुन्ने की अम्मा की (भाषा की ) इस सादगी पर बधाई ।

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