Friday, April 04, 2008

मैं तुमसे प्यार करता हूं कहने के एक तरीका यह भी

इस चिट्ठी में मेरे जन्मदिन के किस्से का जिक्र है।

कुछ समय पहले शास्त्री भाईसाहब ने अपने चिट्ठे 'कच्चे धागे - Building Relations' पर एक चिट्ठी 'मैं तुमसे प्यार करता हूँ!!' नाम से लिखी। वे कहते हैं,
'आपसी स्नेह को प्रगट करना अधिकतर भारतीय पति पत्नी के लिये बहुत मुश्किल है ... इसमें एक बदलाव आना जरूरी है।'
इन्होंने (उन्मुक्त) आज तक यह शब्द मुझसे नहीं कहे, मुझे इन शब्दों का इंतजार है। हां, शास्त्री भाईसाहब की चिट्ठी पर, मुझे बीते दिनो कि एक घटना याद आयी।

यह मेरा जन्मदिन हमेशा याद रखते हैं पर लगभग दो दशक पहले मेरे जन्मदिन पर एक बार मुझसे कुछ नहीं कहा। मुझे लगा कि यह मेरा जन्मदिन भूल गये हैं। मैंने भी इन्हे याद नहीं दिलाया पर बुरा जरूर लगा। उस दिन शाम को हमारे मित्र की बिटिया के जन्मदिन की पार्टी एक रेस्ट्रां में थी। उस समय इनकी एक मीटिंग थी इसलिये ये वहां नहीं जा सकते थे। इन्होने मुझसे जाने के लिये और एक उपहार देने के लिये कहा। बहुत गुस्सा आया - मेरा तो जन्म दिन भी याद नहीं और दूसरे के लिये उपहार।



मैं और मुन्ना शाम को रेस्ट्रां में गये। थोड़ी देर बाद मुझे लगा कि हमारे मित्र और रेस्ट्रां मालिक मेरे बारे में बात कर रहे हैं। वे मेरी तरफ देख रहे थे और कुछ इशारा सा कर रहे थे। मुझे कुछ अजीब सा लगा। इसके बाद रेस्ट्रां मालिक, फूलों का एक सुन्दर सा गुलदस्ता लाया। मैं समझती रही कि यह तो उस लड़की के लिये होगा जिसका जन्मदिन है पर उसने वह मुझे भेंट किया और कहा कि कोई सज्जन इसे मुझे देने के लिये कह गये थे। मैंने उससे उस सज्जन का नाम पूछा तो उसने कहा कि वह उस व्यक्ति को शक्ल से पहचानता है पर नाम नहीं मालुम। गुलदस्ते के साथ लगे कार्ड में लिखा था

'क्या बताने की जरूरत है कि यह गुलदस्ता किसकी तरफ से है।'

हमारे मित्र ने बताया कि वह रेस्ट्रां मालिक, मुझे गुलदस्ता देने में डर रहा था कि कहीं मैं बुरा न मान जाऊं। वह हमारे मित्र से इसी बारे में पूछ रहा था। रेस्ट्रां मालिक को वास्तव में इनका नाम नहीं मालुम था पर जब उसने हमारे मित्र को गुलदस्ता देने वाले का हुलिया बताया तो मित्र ने उसे अश्वस्त किया कि वह व्यक्ति कोई और नहीं पर मेरे पति ही हैं, वे इसी तरह के काम करते हैं। गुलदस्ता देने में कोई हर्ज नहीं।

जन्मदिन पर प्यार जताने का एक तरीका यह भी। जीवन में कुछ न कुछ अप्रत्याशित होते रहना चाहिये।


 उन्मुक्त की पुस्तकों के बारे में यहां पढ़ें।

The photograph published is not mine. I have taken it from here and it is courtesy them.
Hello, I am using this photograph for non profit purpose. Please do let me know if you have any objection. In that event, I will remove it.

11 comments:

  1. बात तो समझ आ रही है पर यह तस्वीर उलटी क्यो है ?

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  2. जैसी भावना व्यक्त करने का तरीका, वैसा ही चित्र :-)

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  3. yes...lovely surprises make life lovelier.

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  4. हाँ, प्यार करने का एक तरीका यह भी हो सकता है. प्यार कैसे भी जताया जाय अच्छा लगता है.

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  5. पहली बार आप के ब्लाग पर आया हूँ। पर उन्मुक्त जी का बधाई देने का तरीका पसंद आया। खास तौर पर तब जब वे आप के साथ नहीं हो सकते थे।

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  6. pahle bhi padh chuki hun lekin aaj jaane kyon zaroori laga ki comment karun..unmuktji aur apke bare main jan kar achha lagaa... munna aur pari ko dheroin shubhkamnaayain

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  7. नमस्कार,

    आपके लेखन की शैली बहुत अच्छी लगी. और लेख भी बहुत पसंद आया. अक्सर ऐसे अप्रत्याशित पल ही सबसे प्यारी स्मृतियाँ बन जाती हैं.

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  8. @ वे इसी तरह के काम करते हैं।
    :) वाह!

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  9. पहली बार ब्लाग पर आयी,और यह गुलदस्ता मन को छू गया!😊

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