मोबाईल फोन

      छुट्टियों मे सुबह समय मिल जाता है, बगल के सरकारी बाग मे पैदल घूमने की सुविधा है: बाग का चक्कर लगाइये और स्वस्थ रहिये| आज सुबह अकेले ही जाना पड़ा| यह तो खुर्राटें मार कर सो रहे थे| रात भर कमप्यूटर मे बैठे थे: टिप्पणी तो कोई आती नहीं पर चिठ्ठी पर चिठ्ठी पोस्ट किये जा रहे हैं| कई बार कहा कि कोई काम कि बात कहोगे तब ही तो कोई टिप्पणी आयेगी, पर सुनते ही नहीं|

      पैदल चलते हुऐ, देखा कि सामने से एक महाशय दोनो हांथों को तेजी से आगे पीछे करते चले आ रहे थे, लगता है कि हांथों की कसरत कर रहे थे| साथ मे तेजी से बड़बड़ा रहे थे| कुछ डर लगा, फिर लगा कि कहीं इसका दिमाग तो ...| थोड़ा और पास पहुंची तो देखा कि महाशय कान मे छोटा सा ear phone लगाये थे और फोन पर बात कर रहे थे| बाल कुछ लम्बे थे| इसलिये ear phone ठीक से दिखायी नहीं पड़ रहा था| फोन का instrument भी दिखायी नहीं पड़ रहा था लगता था कि वह उनके जेब मे था| यह कुछ नयी तरह का फोन था| शायद वायर-लेस पर हो या जैसा कि यह एक दिन बता रहे थे - ब्लू-टूथ पर हो| ब्लू-टूथ - अजीब सा नाम नहीं है| एक दिन मैने इनसे यही कहा तो इन्होने उस राजा की कहानी बतायी थी जिसके कारण यह नाम पड़ा और क्यों उसी राजा को लिया गया| भूल गयी, नहीं तो आपको भी बताती| अपने पर हंसी भी आयी और कुछ शर्म भी| इतना भी नहीं समझ पायी और मालुम नहीं सज्जन के बारे मे क्या क्या सोच लिया|

      इस तरह के फोन और लोग क्यों नहीं रखते| सड़कों पर देखिये: स्कूटर, मोटर-साईकल, कार पर लोग चले जा रहे हैं - बांये हाथ से हैंडल पकड़ा हुआ है, दहिने हांथ मे मोबाईल फोन है जो कि कान पर लगा है| कितनी बात करनी होती है लोगों को| सारा ध्यान बात मे| न सड़क पर चलने वालों कि चिन्ता, न अपनी चिन्ता, न ही अपने घर वालों कि चिन्ता| यदि कुछ हो गया तो घर मे बीबी, बच्चों का क्या होगा| भगवान न करे किसी को हो कुछ हो जाये| सोनिया जी से फ़रियाद करती हूं कि शायद कोई कानून पास हो जाये|

      मैने तो मुन्ने के बापू को न ही केवल अपनी, पर मुन्ने एवं मुन्नी की भी कसम दिलवा रखी है स्कूटर चलाते समय फोन आये, तो उठाओ नहीं पहुंच कर वापस फोन कर लो या जरूरी फोन का इन्तज़ार हो तो बगल मे स्कूटर खड़ी करो और जी चाहे बात करो (ऐसे इनके पास कोई जरूरी फोन आता नहीं)|

      चलूं सुना है बाज़ार मे आज जम्बो झींगा मछली आयीं हैं| बना देती हूं इन्हे पसन्द हैं| टिप्पणी न आने का दुख - कुछ तो कम होगा|

Comments

  1. भौजी, प्रणाम।

    आपकी बात सोलह आने सच्ची है, ई मोबाईल फ़ोनवा तो जीवन को त्रस्त कर के रख दिया है। लोग-बाग गाड़ी चलाते समय भी ध्यान नहीं रखते।

    शायद आपकी पोस्ट से ही कुछ को असर हो जाए। अभी कल ही बाज़ार में एक महिला अपने मोबाईल फोन पर बात करते-करते अपने तीन साल के बच्चे को दुकान में ही छोड़कर निकल गई। कुछ देर बाद फ़िर वापस आई, उसे लेने को।

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  2. वैसे आपके यहाँ झींगा मछली का भाव कितना है?
    हमारे यहाँ यह 300-400 प्रतिकिलो के भाव से मिलता है।
    हर बंगाली की तरह मुझे भी काफी पसंद है। काश मेरी बीवी भी आपकी तरह ..

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  3. भाभी जी, पाए लागू

    आप से एक राज की बात पूछनी थी। यह हिन्दूस्तानी पत्नियाँ अपने इन को ऐवें ही क्यों समझती हैं। हालाकिं पति के लिए जो भाव वे हार्टस ऑफ हार्टस में रखती है वैसा यहाँ कि (अमरीका खासकर) पश्चिमी औरते भी रखती तो यहाँ के वकीलों की छुट्टी हो गई होती। पर फिर बाहरी तौर ऐवें वाली बात के पीछे की मनोस्थिति के बारे में प्रकाश डालिए । अब यह मत कहिएगा कि बिजली नहीँ है तो प्रकाश क्या खाक डालूँ।

    बाकी ब्लूटुथ व राजा की कहानी इन से पूछ कर हमें भी सुनाना

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  4. सही में मोबाईल तो हैरानगति है.. खाशकर रविवार को तो बन्द ही रखना अच्छा लगता है

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  5. कास हमारी पत्नी भी आपकी तरह टिप्पणी न मिलने पर हल्ला शेरी देती। अगर टिप्पणी नहीं भी आती तो खुद लिखने बैठ जाती। लेकिन नहीं, वो आपकी तरह समज़दार थोड़े ही है। कहती है क्या समय बर्बाद करते रहते हो। क्या मिलेगा इससे। आने दो उसको, आपका बिलौग दिखाऊँगा।
    और हां, ई राजा और ब्लूटुथ का का लेना देना। आपकी एप्टीच्यूड तो मानने वाला है। कास हमारी बीवी......

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