अभियान ट्यूरिंग

पहले पहेली बाज भाई साहब की पहेली ने घर मे कम्पन दिये फिर सुनील भाई साहब ने जो अपने चिठ्ठे पर 'बचपन के सपने' नाम की चिठ्ठी पोस्ट कर दी कि पूछिये नहीं कि घर मे क्या हो गया| अरे यह पूछिये कि क्या, क्या नहीं हुआ| बस समझिये भूचाल ही नहीं आया और सब कुछ| सुनील भाई साहब काहे को आपने दुखती नब्ज़ पकड़ ली|

पहले तो साल मे एक, दो बार था, आजकल तो जब देखो तब पुरानी बातो के बारे मे बात करने लगते हैं| अब क्या फायदा उन सब के बारे मे बात करने का| जहां हो उसी मे आनन्द ढूढना चाहिये - वही सत्य है; वही जीवन है| फिर भी यह जो बोलते हैं, सुनती हूं| शायद मुझसे ही बात करने से इनकी भड़ास निकल जाये|

आजकल जुट गयें है उन लोगों के बारे मे लिखने के लिये जिनसे इन्हे प्रेणना मिली है| अभी तो अधूरे सपने नाम की चिठ्ठी पोस्ट की है| उसके बाद रिचर्ड फिलिप्स फाइनमेन पर पहली चिठ्ठी पोस्ट की है, यह ४ या ५ कड़ियों तक जायगि| उसके बाद ये कर्ट गोडेल पर लिखने को कह रहे हैं, फिर रामानुजन पर, फिर आईसेक एसीमोव पर, फिर रौबर्ट ओपेनहाईमर पर, फिर ... पर, मालुम नहीं कब तक कितने लोगों तक यह जायगी|

इनसे पता लगा है कि एक नया चिठ्ठा शुरू हुआ है 'टोने-टुटके'| यह काफी समय, लोगों को टोने-टुटके जैसी चीजो की कमियों तथा गलतियां बताने मे लगाते हैं| मैने 'टोने-टुटके' की किसी चिठ्ठी को नहीं पढ़ा है पर इन्होने इसकी हर चिठ्ठी को बहुत ध्यान से पढ़ा है| लगता है कि कुछ लिखेंगे| इधर नितिन भईया ने भी 'क्या हम सुधरेंगे' नाम की पोस्ट निकाल दी है| तब से कह रहें हैं कि ज्योतिष एवं हस्त रेखा भी एक तरह का टोना-टुटका है| एक सिरीस निकालने 'ज्योतिष और टोने-टुटके' टाईटल से निकालने की बात कर रहे हैं जिसमे बतायेंगे कि ज्योतिष एवं हस्त रेखांये ढकोसला हैं|

मानो तो पत्थर भी भगवान है, न मानो तो पत्थर ही है| यह सब तो विशवास की बातें हैं कईयों को जब कोई सहारा नहीं मिलता है तब लोग इनके पास जाते हैं| पंडित जी ने सुना, सांत्वना दी, कुछ उपचार बताया| इससे उस व्यक्ति को कुछ हिम्मत आयी कुछ इच्छा शक्ति जाग्रत हुई, उसने अपने आप से मुशकिल पार कर ली| मुशकिल हल हो गयी तो बहुत अच्छी बात है, नहीं तो भाग्य के खाते मे डाल दिया| पंडित जी से मिल कर मुशकिल मे कुछ हौसला तो देने वाला कोई मिला| आजकल तो मुशकिल के समय सब साथ छोड़ देते हैं| यह सब तो आस्था की बात है इसमे तर्क तो नहीं लगाना चाहिये|

नितिन भईया ने केवल 'क्या हम सुधरेंगे' नाम की पोस्ट ही नहीं कि पर एक ४=५ सिद्ध करते हुये एक ईमेल भेज दी| उस दिन से कई बार अपने से कहने लगते हैं कि लिखूं कि न लिखूं| मुझे तो कुछ भी नहीं बता रहे हैं पर जरूर कोई विवादस्पद बात लिखने की सोच रहें हैं| हिम्मत होगी तो ...| हिम्मत तो होगी ही,
  • एक बार, मन्दिर-मस्जिद मसले मे हो रही सभा मे बोलने लगे| मन्दिर वाले इतना गुस्सा हो गये कि वहीं मारने पर उतारू हो गये| खैर मनाईये कि पिताजी के मित्रगण भी वहां थे उन्होने बचाया;
  • चुनाव मे हो रही धांधली के खिलाफ बोलना जरूर है| एक बार ऐसे ही चुनाव मे गये, उस क्षेत्र का मतदान चुनाव कमीशन ने इनकी रिपोर्ट पर फिर से करवाया| पर वह उस रात १ बजे लौटे तो सर फटा था, ५ टांके लगे थे - भगवान ने ही रक्षा की| मेरी कसम दिलवाने के बाद ही जाना छोड़ा|
लगता है कि कुछ और ही बात है| क्या ... जरूरत है विवादस्पद मुद्दों पर बोलने की, चुप रहो, कई बार मेरी इनसे बहस हो चुकी है पर मानते ही नहीं|

आजकल तो अपनी प्रिय जगह भी नहीं बैठ रहें हैं| हर समय कम्प्यूटर पर बैठे रहते हैं| टौमी भी हमेशा इन्ही को देखता रहता है| अपनी पदवी के बारे मे तो यह 'शान्ति रहे हमेशा, उससे चिपकी' वाली पोस्ट पर बता चुके हैं| यदि यही ढर्रा रहा तो उसमे 'महा' जुड़ने अब कोई देर नहीं है|

लगता है कि मुझे ही कुछ करना होगा|

क्या आप लोगों को कोई ऐसा प्रोग्राम मालुम है कि इन्टरनेट कट जाये पर फोन न कटे| मालुम हो तो बताइयेगा| मुझे तो इनको ब्लौगिंग से रोकने का यही हल लगता है| मै और लोगों से भी पूंछती हूं| चलू देखूं कि श्रीमान ट्यूरिंग जी का क्या फोन नम्बर है| बात करके देखती हूं उन्हे जरूर मालुम होगा| नहीं तो टेलीफोन ओपरेटर भाईसाहब तो हैं ही| जरूर कोई सटीक तरीका निकालेंगे| इस अभियान का गुप्त नाम मैने 'अभियान ट्यूरिंग' रखा है| इस अभियान मे जैसे ही कुछ प्रगति होती है मै आपको बताती हूं| पर प्रगति हुई तो आपको खुद ही मालुम चल जायगा - यह आपको अपनी चिठ्ठियों से बोर नहीं कर पायेंगे|

Comments

  1. भाभीजी,

    प्रणाम!

    उंमुक्त जी को दो नये विषय बताने की गलती मैने ही की, तो क्षमाप्रार्थी हूं। लेकिन
    क्या करूं उन्मुक्त जी लिखते इतना अच्छा है कि मुझ से रहा नहीं गया उन्हे विषय दिये बिना!
    आप से अनुरोध है कि कृपया उनके लेखन पर कोई पारिवारिक फतवा ना जारी करें,
    आखिर हम जैसे आरक्षित पाठकों का भी ध्यान रखें।

    एक अनुरोध उन्मुक्त जी से भी - आपके पास अब इतने विषय हो गये है हर विषय का दिन निर्धारित कर ले और लिखे
    शायद भाभीजी इससे मान जाये।

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  2. राजीव1:48 AM

    आदरणीय भाभीजी,
    नमस्कार, मैं आपका चिठ्ठा कदचित नियमित पढ़ता हूं पर कभी टिप्पणी की हिम्मत नहीं कर सका। - आप और उन्मुक्त जी लिखते इतना व्यावहारिक और सटीक जो हैं! अपने-अपने दृष्टिकोण से दोनों ही चिठ्ठे बहुत उम्दा हैं। इस बार जो आपने बात लिखी तो मेरे पास एक सुझाव ज़रूर है जिससे आपका टेलीफोन तो चलता रहे पर internet नहीं। पहली बात तो यह कि यह तरीक़ा अकाट्य नहीं है और दूसरी यह कि ऐसे तरीक़े को बता कर क्या हम स्वयं ही अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारें और एक अच्छे चिठ्ठे से वंचित हो जायें - कदापि नहीं। आशा है कि आप रुचि लेने वाले पाठकों को निराश करने वाले उपक्रमों का विचार त्याग कर हमें अनुगृहीत करेंगी।

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  3. भाभीजी परनाम,
    काहे आप भाईसा'ब के पीछे पङी हैं, उन्हे लिखने दे. इससे उनके पाठकगण उलजलुल पढ कर प्रसन्न रहेंगे और इधर भाईसा'ब भी व्यस्त रहेंगे तो आपकी जान को भी शांति रहेगी.
    गृह-शांति का उत्तम टोटका- पति को ब्लोग लिखने में व्यस्त रखो.

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