Friday, September 07, 2007

भंरवां टिन्डे

मैंने अपनी पिछली चिट्ठी में लिखा था कि मुझे बेक्ड फिश बनाने जाना है। मैं इस बार यही बनाने की विधि लिखने की सोच रही थी पर इसी बीच निशा जी ने भंरवां टिंडे बनाने की विधि बतायी। मैं इसे कुछ अलग तरह से बनाती हूं। यह इस प्रकार है। आप इसे इस तरह भी बना कर देखें।

सामग्री
टिण्डा ५०० ग्राम
आलू २०० ग्राम
पनीर १०० ग्राम
प्याज १०० ग्राम
लहसुन १० ग्राम
टमाटर ५० ग्राम
अदरक १० ग्राम
हरी धनिया १ गड्डी
गरम मसाला पाउडर १० ग्राम
अमचुर १० ग्राम
रिफाइण्ड तेल १०० ग्राम
धनिया पाउडर ५ ग्राम
हल्दी पाउडर ५ ग्राम
नमक स्वादानुसार

विधि
१- टिण्डों को छीलने के बाद ऊपर का ढक्कन काट दें। स्कूपर से अन्दर का गूदा निकालें। टिण्डों और ढक्कनों को उबलते हुए नमकीन पानी में छोड़ दें ताकि वह थोड़ा पक जाएं। पानी से बाहर निकाल कर टिण्डों को उलट कर रख दें।
२- आलू उबालकर छील लें। थोड़ा तेल में जीरा का छौंक देकर आलू, पनीर एवं टिंडों के गूदे को डालकर पकाएं। इसमें बारीक कटा हुआ हरा धनिया, नमक स्वादानुसार, अमचूर एवं गरम मसाला पाउडर मिलाकर खूब भूनें। ठण्डा होने पर टिण्डों में भर दें।
३- प्याज, लहसुन अदरक एवं टमाटर को कद्दूकस में किस लें। थोड़े तेल में इनको डालकर पकाएं। हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर और नमक डालने के पश्चात थोड़ा पानी मिलाकर रसा बनाएं।
४- एक बेंकिंग डिश में इस रसे को डालकर टिण्डों (ढक्कन लगाने के बाद) को सजा दें और ओवेन में १५० डिग्री सेन्टीग्रेड पर आधा घंटे तक बेक करें।

4 comments:

Shastri JC Philip said...

आज ही हम अपनी अर्धांगिनी को यह बताते हैं क्योंकि वे तमाम तरह की सामग्री बनाती रहती है.

मेरा तो रसोई से सिर्फ उतना संबंधा है जितना शतुरमुर्ग का सागर से -- शास्त्री जे सी फिलिप

जिस तरह से हिन्दुस्तान की आजादी के लिये करोडों लोगों को लडना पडा था, उसी तरह अब हिन्दी के कल्याण के लिये भी एक देशव्यापी राजभाषा आंदोलन किये बिना हिन्दी को उसका स्थान नहीं मिलेगा.

Udan Tashtari said...

आभार. बना कर देखते हैं, फिर बतायेंगे जी.

संजय बेंगाणी said...

बनाने की कोशिश करेंगे.

Shastri JC Philip said...

सुनते हैं कि आपका लेख "मोबाईल फोन"एकाध दिन में सारथी पर प्रगट होने जा रहा है! बधाईयां. घूस में भरवां टिण्डे स्वीकार्य हैं!!