Thursday, May 03, 2007

चट-चट

मैं सुबह तो कभी अकेली सैर पर चली जाती हूं पर शाम को हमेशा इन्ही के साथ जाती हूं। पिछली बार जब अकेले गयी थी तब एक महाशय अपने से बात करते मिल गये थे। कुछ दिन पहले हम शाम को पैदल सैर पर जा रहे थे तो एक सज्जन अपनी पत्नी के साथ जाते मिले। उनके पीछे एक सहायक टेनिस का बल्ला घुमाता चल रहा था। बड़ा अजीब लग रहा था। इनसे नहीं रहा गया। इन्होने पूछा कि पैदल सैर पर टेनिस बल्ले का क्या काम है। वे सज्जन मुस्कराये फिर बताया कि,
'सैर करते करते हम लोग सुस्ताने के लिये बेन्च पर बैठ जाते हैं। उस समय मच्छर काटने लगते हैं। यह बल्ला मच्छर मार है। इसमें रिचार्जेबेल बैटरी लगी है। इसका स्विच ऑन कर घुमाने पर इसके लपेट पर आने वाले मच्छर मर जाते हैं।'
उन्होने इसका प्रदर्शन कर के भी दिखाया। कुछ मच्छर इसके चपेट में आये । चट से आवाज हुई, एक चिन्गारी निकली और मच्छर का काम तमाम।

मैं नहीं जानती पर कि अमित भैइया के द्वारा बताये गये मोबाईल से मच्छर भाग सकते हैं कि नहीं पर यह तरीका कारगार है। रवी भाईसाहब आप पांच मोबाईल लेकर घूमने की बात कर रहे थे इसे ले कर देखिये। यह बल्ला मंहगा नहीं है मैंने भी एक बल्ला खरीद लिया है। २२० रुपये का पड़ा। ज्लदी में खरीदा था मोल भाव नहीं कर पायी। यदि करती तो शायद कुछ कम कर देता।

चलती हूं इम्तिहान की कापियां आयी हैं, जांचना है। देखती हूं क्या किसी ने फिर कोई कविता लिख दी जैसे पिछले साल लिखी थी। यदि मिलेगी तो बताउंगी।

इसी बीच आप चाहें तो, इनके द्वारा लिखी तूफानी-अंधेरी रात में बस स्टॉप पर वाली पहेली या फिर यदि हमने जानी है जमाने में रमती खुशबू की दूसरी कड़ी
Our sweetest songs are those that tell of saddest thought पढ़ सकते हैं।