Friday, June 09, 2006

अभियान ट्यूरिंग – सफल

अभियान ट्यूरिंग – सफल हुआ - प्रोग्राम तो इतना अच्छा बना है कि क्या बताऊं|

यह फोन तो कर सकेगें, शायद ईमेल भी चेक कर ले - पर ब्लौगिंग नहीं कर पायेंगे| है न कितना अच्छा प्रोग्राम और इसका काट भी नहीं है - कर्ट गोडेल के पास भी नहीं जिसके बारे मे यह एक सीरीस शुरू करने की कह रहें हैं या जिसका काम GöDEL, ESCHER, BACH: An Eternal Golden Braid A Metaphorical Fugue On Minds and Machines in the Spirit of Lewis Carroll; Douglas R. Hofstader मे समझाया है| मै इनसे इस किताब और एक दूसरी किताब The Emperor's New Mind by Roger Penrose के बारे मे बताने के लिये कहूंगी| यह इनकी प्रिय पुस्तकें हैं और इसकी मालुम नहीं कितनी कौपियां इन्होने अपने सहपाठियों के बच्चों और स्नातक के क्षात्र एवं क्षात्राओं को परुस्कार मे दिया है| मेरे विचार से आप तो वह प्रोग्राम जानने मे ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं?

सच्ची बात यह है कि ट्यूरिंग जी ने मना कर दिया और कहा है कि इस तरह का कोई भी कमप्यूटर का प्रोग्राम नहीं बनाया जा सकता है| यह असम्भव है - फिर यह प्रोग्राम कैसे सम्भव हुआ?

पहेली बाज भाईसाहब ने जब पहेली चिठ्ठा शुरू किया तो इन्होने एक दिन मजाक मे बच्चों से यह विरोधाभास पहेली के रूप मे बूझ ली,
'एक कसबे मे एक ही नाई था| उसकी दुकान के सामने बोर्ड लगा था कि वह उन सब लोगों की दाढ़ी बनाता है जो अपनी दाढ़ी स्वयं नहीं बनाते हैं| सवाल यह है कि उस नाई की दाढ़ी कौन बनाता है?'
बस बच्चों ने इसी विरोधाभास पहेली का हल ढ़ूढने मे ट्यूरिंग अभियान सफल होने का भी प्रोग्राम बना लिया|

हम लोग सपरिवार छुट्टी पर ऐसी जगह जा रहे हैं जहां पर इन्टरनेट की अच्छी सुविधा नहीं है| ब्लौगिंग से छुट्टी - शायद कभी, कहीं साईबर कैफे मे जा कर ईमेल ही चेक कर पायें| इनकी ब्लौगिंग तो इस महीने के बाद ही हो पायेगी|

मेरी और बच्चों की छुट्टी जून मे होती है इसीलिये यह भी तभी काम से समय निकालते हैं| पर यह जाने से पहले अपनी सारी सिरीस समाप्त करना चाहते थे, इसीलिये कुछ ज्यादा चिठ्ठियां पोस्ट कर रहे थे|
इनकी फाइनमेन की सिरीस की अन्तिम कड़ी जिसमे वे उनके व्यक्तित्व एवं उनके जीवन की कुछ और घटनाओं के अलावा उन पर लिखी किताबों का जिक्र किया है वह 'रिचर्ड फिलिप्स फाइनमेन-५' के नाम से यहां प्रकाशित किया है|
इनकी नारद जी की छड़ी और शतरंज का जादू की सिरीस की अन्तिम कड़ी जिसमे वे नारद जी की छड़ी पहेली के हल का शतरंज के जादू से रिश्ता और इस हल का कमप्यूटर विज्ञान से सम्बन्ध का जिक्र किया है वह 'नारद जी की छड़ी और शतरंज का जादू-६' के नाम से यहां प्रकाशित किया है|
इनकी लिनेक्स की उन्मुक्त पर शुरू सिरीस १५ कड़ियों मे समाप्त हो गयी है| उसे इन्होने एक जगह करके पी.डी.एफ. फौरमैट तथा HTML मे लिनेक्स के नाम से यहां नये चिठ्ठे लेख मे प्रकाशित किया है|

मैं नहीं बता सकती कि रिचर्ड फिलिप्स फाइनमेन की सिरीस या नारद जी की छड़ी और शतरंज के जादू वाली सिरीस ये एक जगह रख कर प्रकाशित करेंगे कि नहीं| मै यह भी नहीं बता सकती कि लौट कर आने के बाद यह कौन सी सिरीस शुरू करेंगे:
  • गणित, चिप, और कमप्यूटर विज्ञान; या फिर
  • ज्योतिष, हस्तरेखा-शास्त्र, अंकविद्या (numerology), और टोने-टुटके; या फिर
  • अपनी विवादस्पद सिरीस जिसे ये यहां बता रहे हैं; या फिर
  • कर्ट गोडेल की जीवनी, जिसका काम यह बताता है कि कोई भी सौफ्टवेर अभेद नहीं है और शायद तभी इस नाई की समस्या का हल भी बतायें; या फिर
  • किसी और की जीवनी के बारे मे लिखें|
इनकी बात यह ही जाने| मै तो चलूं, रात मे ट्रेन पर खाने के लिये पूड़ी और आलू की सब्जी बनानी है| मठरी और अचार पैक कर लेती हूं वहां काम आयेगा|

Thursday, June 01, 2006

अभियान ट्यूरिंग – प्रगति

मैने अपनी पिछली पोस्ट मे जिक्र किया था कि ट्यूरिंग जी मेरे लिये इस तरह का प्रोग्राम बना सकते हैं कि इन्टरनेट कट जाये पर फोन न कटे| विडम्बना देखिये, ट्यूरिंग जी के बारे मे मैने सुन रखा था पर उनके बारे मे जानने का मौका इनके कारण ही मिला|

ये गणित, चिप, और कमप्यूटर विज्ञान पर एक सिरीस लिखने की बात कर रहें है इन्होने इस सिरीस की रूप रेखा बना ली है| वे इसमे बतायेंगे कि,
  • गणित और गणितज्ञों का क्या और किस प्रकार से कमप्यूटर विज्ञान मे योगदान है;
  • चिप क्या है
  • चिप मे किस तरह से बौधिक सम्पदा अधिकार सुरक्षित किये जाते हैं;
  • क्या कम्प्यूटर विज्ञान अपने पठार पर पहुंच रहा है और इसका विस्तार यहीं समाप्त हो जायगा और केवल applications मे सीमित हो जायेगा| या फिर इसमे भी कोई क्रान्ति आयेगी| यदि आयेगी तो किस तरफ से|
ये यह भी कहते हैं कि कम्प्यूटर विज्ञान मे क्रान्ति गणित के दो क्षेत्रों से आयेगी
  • Artificial Intelligence
  • Knot theory/topology
कम्प्यूटर विज्ञान के क्षेत्र मे आने वाली क्रान्ति की कड़ी को वे मुझसे लिखने को कह रहें हैं| इनको इस पर लिखने मे कठिनाई है क्योंकि इनका विज्ञान से सम्बन्ध लगभग४० साल से छूट गया है| तब यह विषय भी नहीं पढ़ाये जाते थे| पर मेरा सम्बन्ध विज्ञान से अब भी है मैं विज्ञान पढ़ाती हूं| इन्होने मुझे दो किताबें भी पढ़ने को दी हैं|
  • The Cambridge Quintet by John L. Casti
  • GöDEL, ESCHER, BACH: An Eternal Golden Braid A Metaphorical Fugue On Minds and Machines in the Spirit of Lewis Carroll; Douglas R. Hofstader.

The Cambridge Quintet कैम्ब्रिज मे पांच लोगो के बीच रात्रि भोज की काल्पनिक कहानी है जिसमे वे Artificial Intelligence के उपर बात कर हैं यह पांच लोग हैं

  1. सी.पी. स्नो, भौतिक शास्त्री एवं सरकारी सेवक
  2. एलेन ट्यूरिंग, गणितज्ञ (Artificial Intelligence)
  3. जे.बी.एस. हालडेन, Geneticist
  4. Erwin Schrodinger, भौतिक शास्त्री एवं नोबेल पुरुस्कार विजेता
  5. Ludwig Wittgenstein, दर्शन शास्त्री
(क्या हमारे जर्मनी मे रहने वाले कोई से भईया आखरी दो नाम का ठीक उच्चारण देवनागरी लिपि मे लिख कर बतायेंगे)

इनके अनुसार यह पुस्तक Artificial Intelligence के हर पहलू को अपने ढ़ंग से रखती है और शायद यह सच भी है क्योंकि इसके लेखक स्वयं जाने माने व्यक्ति हैं और गणित मे PhD हैं| बस यहीं मेरी मुलाकात श्रीमान ट्यूरिंग जी से हुई है| उन्होने मुझे बताया है कि वे प्रोग्राम लिख रहे हैं और शीघ्र भेजेंगे| अब दूसरी पुस्तक पढने की कोई जरूरत नही है क्योंकि जब इनकी ब्लौगिंग बन्द, तब मेरी भी बन्द – आखिर मेरे चिठ्ठे का नाम तो मुन्ने के बापू है, इन ही के चारो तरफ घूमता है| जब यह नहीं, तो मै भी नहीं|

मुझे कुछ जल्दी करनी होगी, क्योंकि इनकी ब्लौगिंग बढ़ती जा रही है| इन्होने एक और चिठ्ठा लेख नाम का खोल लिया है| इनकी ९. ओपेन सोर्स सौफ्टवेर - फ्री सौफ़टवेर: इतिहास की पोस्ट पर रवी भईया ने टिप्पणी कर के सुझाव दिया था कि ओपेन सोर्स सौफ्टवेर की सिरीस समाप्त होने के बाद पूरी सिरीस को एक जगह करके पी.डी.एफ. फौरमैट मे रखें| बस यही सुझाव मान कर पी.डी.एफ. फौरमैट तथा HTML मे ओपेन सोर्स सौफ्टवेर के नाम से यहां रख दिया है कह रहे थे कि लिनेक्स वाली भी रखूंगा और मालुम नहीं कौन कौन सी रखेंगे|

हां, फाइनमेन के बचपन के बारे मे कड़ी भी इन्होने उंमुक्त के चिठ्ठे पर रिचर्ड फिलिप्स फाइनमेन-२ नाम की पोस्ट पर कर दी है आप चाहे तो देख सकते हैं|

मालुम नहीं कितना समय बेकार कर रहें हैं, मुझे जल्दी ही कुछ करना होगा|